बॉलीवुड एक्टर अभय देओल पिछले 15 सालों से इस इंडस्ट्री में हैं और उन्होंने अभी तक 20 से अधिक फिल्में ही की हैं। वह फिल्मों के चयन को लेकर काफी सेलेक्टिव हैं। इसलिए फिल्मों में कम ही दिखाई देते हैं। लेकिन दिनों अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने 19 अगस्त को पोस्ट किया था। जिसमें अपनी फिल्म ‘ रांझणा’ की आलोचना की।

क्यों की आलोचना?

अभय का मानना है कि फिल्म के कुछ दृश्य महिला शोषण को बढ़ावा देते हैं।उन्होंने फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए लिखा,“इतिहास इस फिल्म में दिए गए रिग्रेसिव मैसेज को कभी माफ नहीं करेगा। ये दसियों साल से बॉलीवुड की थीम रही है जहां एक लड़का, लड़की का तब तक पीछा करता है जब तक वो हां न कर दे। सिर्फ फिल्मों में ही वो अपने मन से काम करती है। रियल लाइफ में हम देखते आए हैं कि ये सेक्सुअल हैरेसमेंट का रूप ले लेता है। इसे स्क्रीन पर दिखाना, विक्टिम को ब्लेम करने जैसा लगता है।”

शख्स जिसने अभय को किया सोचने पर मजबूर

दरअसल अभय देओल ने इस पोस्ट में एक शख्स (@oldschoolrebel9) को भी टैग किया है। जिसने फिल्म के इस एंगल पर बातें कहीं थीं। अभय, उस शख्स के विचार से सहमत दिखे। जिसके बाद उन्होंने ये पोस्ट शेयर किया। इस पोस्ट के साथ ‘रांझणा’ के पोस्टर को भी शेयर किया है जिसमें सोनम कपूर और धनुष दिखाई दे रहे हैं। अभय ने अपनी पोस्ट में अपने फॉलोवर्स और रीडर्स से ये भी अपील की है कि वो इस बारे में क्या सोचते हैं ये भी जरूर बताएं।

क्या था रांझणा का प्लॉट?

फिल्म में कुंदन (धनुष) को ज़ोया (सोनम कपूर) से प्यार हो जाता है। वह हर जगह उसका पीछा करता है। सपने देखता है कि ज़ोया को भी उससे प्यार हो जाएगा। जब ज़ोया उससे बात करने से मना करती है तो वो अपना हाथ काटने की धमकी देता है। फिल्म में अभय ने ज़ोया के सिख बॉयफ्रेंड का रोल निभाया था, जिसे पीट-पीटकर मार दिया जाता है। आनंद एल राय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में स्मॉल टाउन रोमांस को दिखाते हुए लड़की के यौन शोषण को आम बात की तरह दिखाया गया था।

बॉलीवुड एक्टर अभय देओल ने साल 2005 में इम्तियाज अली की फिल्म ‘सोचा ना था’  से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। अभय ने ‘देव डी’ और ‘ओए लक्की लक्की ओए’ में अपनी बेहतरीन एक्टिंग से लोगों का दिल जीता है।

ऐसा पहली बार है जब किसी एक्टर ने अपनी ही फिल्म की आलोचना की हो। ज्यादातर एक्टर इस तरह की फिल्मों को लेकर यही कहते नजर आते हैं कि फिल्म में समाज का आइना दिखाया गया है। फिल्में जो मैसेज दे रही है उसे लोग किस तरह ले रहे हैं ये उन पर निर्भर करता है।

©आयुषी

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