अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में 11 अगस्त को अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें से एक याचिका में रिया ने सुशांत के पिता केके सिंह की ओर से पटना में दर्ज कराए गए मामले को मुंबई स्थानांतरित करने की अपील की। तथा दूसरी याचिका अनुचित मीडिया ट्रायल को लेकर थी।मामले में करीब 3 घंटे चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती की ट्रांसफर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

रिया की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान तो बिहार सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह पैरवी कर रहे थे। वहीं, सुशांत के पिता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह और महाराष्ट्र सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी पैरवी पैरवी कर रहे थे।

”रिया के वकील श्याम दीवान ने ऋषिकेश रॉय की सिंगल बैंच के सामने याचिका दोहराते हुए कहा”  कि मुंबई में हुई घटना की एफआईआर पटना में दर्ज किया जाना और पटना पुलिस द्वारा इस मामले को बिहार सरकार के दवाब में आकर सीबीआई को सौंपना कानूनी तौर पर गलत है। बिहार सरकार द्वारा इस मामले को चुनाव का मुद्दा बनाया जा रहा है। और रिया चक्रवर्ती को इस राजनीतिक खींचतान में शामिल किया जा रहा है। रिया का मीडिया ट्रायल भी कराया जा रहा है। जिससे लगता नहीं कि जांच निष्पक्ष रूप से हो पाएगी।

रिया के वकील की इस दलील पर बैंच ने सवाल किया कि याचिका में आपके पक्ष को सीबीआई की जांच से कोई आपत्ति नहीं थी? इस पर रिया के वकील ने कहा कि हमें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन जिस तरह बिहार सरकार ने इस मामले को सीबीआई को सौंपा और सीबीआई ने उसकी जांच शुरू की उससे इस मामले की निष्पक्षता खत्म हो जाती है। हम चाहते हैं कि मुंबई पुलिस की जांच के बाद ही तय हो कि सीबीआई इस मामले की जांच करेगी या नहीं।

“इस पर बिहार सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकील मनिंदर सिंह ने कड़ा विरोध करते हुए कहा” कि इस मामले में बिहार मुख्यमंत्री को घसीटना गलत है। मीडिया में महाराष्ट्र के नेताओं पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं लेकिन हम उस पर जाना नहीं चाहते। उन्होंने कहा, ” देखकर तो लगता है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुंबई पुलिस पर दवाब बनाया जा रहा है। क्योंकि 14 जून को अभिनेता की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने जांच के नाम पर केवल खाना पूर्ति की। और 25 जून को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की। जांच के नाम पर केवल बड़ी हस्तियों से पूछताछ करती रही जिससे लगे की मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जबकि एफआईआर केवल बिहार पुलिस की ओर से दर्ज की गई और उसी एफआईआर को लेकर जांच सीबीआई को सौंपी गई। जो कि कहीं से गलत नहीं है। अगर सुशांत के पिता कह रहे थे कि उनके खाते से पैसे चोरी हो रहे थे और उनके इकलौते बेटे की मौत संदिग्ध हालात में हुई। इन सब बातों के बाद बिहार पुलिस के एफआईआर दर्ज किया जाना ओर सीबीआई जांच करवाना कहीं से गलत नहीं है।

“महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील मनु सिंघवी ने संघीय ढ़ांचे का हवाला देते हुए कहा” कि देश में जिस तरह की संघीय ढांचा है उसके बाद एक राज्य, दूसरे राज्य में हुई घटना की एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती और ना ही उसपर सीबीआई जांच करवा सकती है। उनका कहना है कि इस अपराधिक मुकदमे सीपीआरसी की हत्या हो रही है जब की सुप्रीम कोर्ट को नहीं होने देना चाहिए।

“वहीं सुशांत के पिता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने रिया के वकील और महाराष्ट्र सरकार के वकील की दलीलों का विरोध करते हुए कहा” कि महाराष्ट्र सरकार के बेटे का नाम भी मीडिया में आ रहा है। लेकिन हम उस पर कोई दलील नहीं देना चाहते है। लेकिन जांच सीबीआई करे तो ठीक है जिससे निष्पक्षता बनी रहेगी। सुशांत के पिता ने कई बार रिया और उनके करीबियों से पूछा कि उनके बेटे का कैसा इलाज चल रहा है? वो उनसे मिलने आना चाहते हैं। लेकिन रिया और उनके दोस्तों की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। और इसके बाद सुशांत का संदिग्ध हालत में मृत पाया जाना। जिसके बाद भी मुंबई पुलिस का एफआईआर दर्ज ना करना। हम चाहते हैं इस मामले को सीबीआई को सौंपा जाए।

ऋषिकेश रॉय ने तीन घंटे तक सभी पक्षों को ध्यान से सुनने के बाद याचिका पर आदेश को सुरक्षित रखते हुए। सभी पक्षों से कहा है की गुरुवार तक दलीलों की संक्षिप्त नोट दे सकते हैं। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश किस तरफ होगा।

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